March 10, 2026

इतिहास का एक ऐसा राजनेता, जो हमेशा इतिहास का हिस्सा बना वो भी रोचक तथ्य के साथ, जो चुनाव हारा या जीता लेकिन बन गया इतिहास

इतिहास का एक ऐसा राजनेता, जो हमेशा इतिहास का हिस्सा बना वो भी रोचक तथ्य के साथ, जो चुनाव हारा या जीता लेकिन बन गया इतिहास नीलम संजीव रेड्डी

चलिए आपको एक राजनीतिक इतिहास के सफर पर ले चलता हूं

इतिहास एक व्यक्ति का या एक राजनेता का कितना पीछा कर सकता है. एक ही व्यक्ति के नाम को कितनी बार इतिहास से जोड़ा जा सकता है, यह आप सोच नहीं सकते. मैं दावा करता हूं कि आप राजनीति के छात्र हो सकते हैं, लेकिन आपने कभी भी इन सभी तथ्यों को एक साथ जोड़कर नहीं देखा होगा.

एक अनोखा राजनेता

भारत में कितने ही राजनेता हुए, जो दो बार राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार बने हैं. एक बार राष्ट्रपति का चुनाव जीता और एक बार हार का सामना करना पड़ा. जब चुनाव में हार का सामना किया तब भी इतिहास बना, जब चुनाव जीता तब भी इतिहास बना. वे भारत के 77 साल के गणतंत्र के एकमात्र निर्विरोध राष्ट्रपति बने हैं. यही नहीं, जब वह राष्ट्रपति का चुनाव हारे थे तो भारत को अब तक का एकमात्र निर्दलीय राष्ट्रपति वी.वी. गिरि मिले.

उनकी राजनीतिक यात्रा

राष्ट्रपति बनने से पहले यह राजनेता लोकसभा का अध्यक्ष भी रहा, वो भी एक बार नहीं दो बार. वह एक ऐसे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने, जो भारत का भाषा के आधार पर पहला राज्य था. उस राज्य के मुख्यमंत्री बनने से पहले उसी राज्य के उप मुख्यमंत्री भी रह चुके थे. वह एक स्वतंत्रता सेनानी भी रहे. 1960 से 1963 तक भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. 1964 से 1970 तक राज्यसभा के सदस्य रहे. केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थे.

वे कांग्रेस में इंदिरा गांधी के साथ भी रहे और बाद में इंदिरा गांधी की कांग्रेस के खिलाफ भी रहे. वह कांग्रेस में सिंडिकेट गुट से आते थे.

नीलम संजीव रेड्डी

मैं बात कर रहा हूं मद्रास में जन्मे और बाद में आंध्र प्रदेश के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने नीलम संजीव रेड्डी की. अभी उनके जीवन की पूरी यात्रा बाकी है. आज हमने बात उनके उस इतिहास की जो लोग जानकर और पढ़कर भी अनजान हैं. क्या आपने कभी भी इन सारी बातों को एक साथ जोड़कर देखा था? आशा करता हूं, आपको यह जानकारी रोचक लगी होगी. मेरा निरंतर प्रयास रहेगा कि आपको ऐसी ही जानकारियां देता रहूं.

1969 के राष्ट्रपति चुनाव को कौन भूल सकता है, और नीलम संजीव रेड्डी तो उस कहानी और इतिहास का हिस्सा रहे हैं. तो उनके जीवन की पूरी यात्रा आगे कभी.

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