27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू के निधन ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया। सवाल सिर्फ़ इतना नहीं था कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, बल्कि यह भी था कि क्या कांग्रेस पार्टी इस ऐतिहासिक मोड़ पर एकजुट रह पाएगी। इसी चुनौती के केंद्र में उभरे के. कामराज, जिनकी भूमिका ने 1964 […]
