शिक्षा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए, क्योंकि हमारी शिक्षा व्यवस्था आज भी उन्ही पुरानी व्यवस्थाओं का पालन कर रही है| हमारी शिक्षा व्यवस्था में सिर्फ प्रश्न और उत्तर लिखना सिखाया जाता है अब समय बदल गया है अब नई शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है| आज देश में AI Summit जैसे बड़े आयोजन हो रहे हैं, […]
चुनावी इतिहास का सफर: मतपेटी से ईवीएम तक
भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में मतदान प्रणाली का विकास एक रोचक और प्रेरक कहानी है। आजादी के बाद पहले आम चुनाव से लेकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन तक का यह सफर भारतीय चुनाव आयोग की दूरदर्शिता और तकनीकी प्रगति का प्रतीक है। पहले आम चुनाव: एक अनोखी चुनौती 1951-52 में हुए भारत के पहले आम […]
नेहरू के बाद कौन? 1964 का उत्तराधिकार संकट और ‘किंगमेकर’ कामराज
27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू के निधन ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया। सवाल सिर्फ़ इतना नहीं था कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, बल्कि यह भी था कि क्या कांग्रेस पार्टी इस ऐतिहासिक मोड़ पर एकजुट रह पाएगी। इसी चुनौती के केंद्र में उभरे के. कामराज, जिनकी भूमिका ने 1964 […]
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से जुड़ी भारत रत्न की अनोखी परंपरा
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो असाधारण राष्ट्रीय सेवा और योगदान के लिए दिया जाता है। भारत के इतिहास में कुछ ऐसे अनूठे उदाहरण मिलते हैं, जहां राष्ट्रपति ने पहले किसी प्रधानमंत्री या पूर्व प्रधानमंत्री को भारत रत्न प्रदान किया और बाद में स्वयं यह सम्मान प्राप्त किया। ये घटनाएँ केवल सम्मान […]
स्वतंत्र भारत की वैचारिक बहस: गांधी बनाम नेहरू
महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बीच मतभेदों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण समाजवाद से जुड़ा हुआ है। नेहरू जी समाजवाद के प्रबल समर्थक थे और वे मानते थे कि भारत की गरीबी और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण, राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था और समाजवादी मॉडल अपनाना आवश्यक है। वहीं, महात्मा गांधी […]
क्या वापस आ गये बॉलीवुड के अच्छे दिन ?
कोविड 19 के बाद से ही बॉलीवुड अपने खराब दौर से गुजर रहा हैं। हिन्दी फिल्मों का एक समय था, जब दर्शको को फिल्मों का इंतजार रहता था। फिल्म आते ही सिनेमा घर भर जाते थे। काफी लम्बे समय बाद ऐसा लग रहा है, कि दर्शकों को इस बार भरपुर मनोरंजन मिलने वाला है। 19 […]
