March 10, 2026

AI समिट में यूथ कांग्रेस ने दिखाया सर्कस, बुनियादी मुद्दों से देश को भटकाया

AI समिट में यूथ कांग्रेस ने दिखाया सर्कस, बुनियादी मुद्दों से देश को भटकाया यूथ कांग्रेस का AI समिट में प्रदर्शन

आज कांग्रेस पार्टी के युवा संगठन यानी यूथ कांग्रेस ने भारत मंडपम में सरकार के विरोध में जो प्रदर्शन किया, उस पर सरकार का आरोप है कि इससे देश की छवि को नुकसान हुआ है. असल में कांग्रेस ने जो कदम आज उठाया है, उससे कांग्रेस को अधिक नुकसान आने वाले संसद सत्र में होने वाला है.

अगर आप पिछले एक महीने की राजनीति पर गौर करें तो आप पाएंगे कि मोदी सरकार अपने 12 साल के कार्यकाल में सबसे ज्यादा कमजोर स्थिति से गुजर रही है. सरकार के सामने विपक्ष ने इस तरह के मुद्दे खड़े किए है, जिस पर सरकार घिरती नजर आ रही हैं. यह मुद्दे निम्न है-

पहला मुद्दा- एप्सटीन फाइल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम आया जिसको लेकर उन्हें खुद ही प्रेस वार्ता की और अपनी सफाई दी. सरकार ने लगभग इस विषय पर मंत्री हरदीप पुरी को अकेला छोड़ दिया है. साथ ही तथाकथित प्रधानमंत्री के ऊपर भी विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इल्जाम लगाए हैं.

दूसरा मुद्दा – भारत और अमेरिका का व्यापार समझौता था जिसमें अमेरिका ने भारत पर 18% का टैरिफ लगाया है जबकि भारत ने अमेरिका पर कोई भी टैक्स नहीं लगाया. इस विषय पर भी विपक्ष मुखर है. विपक्ष सरकार के ऊपर अमेरिका के आगे झुक जाने का आरोप लगा रहा है.

तीसरा मुद्दा – पूर्व सेना अध्यक्ष नरवाणे की किताब को लेकर था. वह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है. जिसको नेता प्रतिपक्ष लोकसभा में कोट करना चाहते थे. जिसपर सरकार ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई. उस किताब में भारत और चीन के सीमा विवाद के बारे में बताया गया है.

चौथा मुद्दा – भारत की विदेश नीति को लेकर था. विपक्ष लगातार सरकार के विदेश नीति के ऊपर हमलावर है.

विपक्ष आ रहा था साथ

इन चार मुद्दों को लेकर अगर कांग्रेस पार्टी आने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में आगे बढ़ती तो सरकार की मुसीबत बढ़ सकती थी. संसद में इन विषयों को उठाती तो वह बीजेपी को फिर से घेर सकती थी. इससे भी बड़ी बात यह थी कि लगभग सभी विपक्षी दलों की इन चार मुद्दों पर आपसी सहमति बना ली थी.

अडानी-अंबानी के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस(AITMC) और समाजवादी पार्टी(SP) कांग्रेस का साथ नहीं देती हैं, लेकिन इन चार मुद्दों पर ये पार्टियाँ कांग्रेस का साथ दे रही थीं. विपक्ष एकजुट भी लग रहा था.

कांग्रेस के पास है बड़ा मौका

इसके साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का आना, राहुल गांधी के ऊपर पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विशेषाधिकार प्रस्ताव की बात की जिससे वो पीछे हट गए. बाद में प्राइवेट मेंबर बिल के द्वारा निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के ऊपर सब्सटेंटिव मोशन प्रस्ताव सदन में रखा था. यानी कुल मिलाकर सरकार राहुल गांधी से परेशान हो गई थी, विपक्ष भी साथ हो गया था, सरकार घिरी-घिरी दिख रही थी.

भाजपा बनायेगा मुद्दा

लेकिन अब इस समय में भारत मंडपम AI समिट में कांग्रेस ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे ऐसा लग रहा है कि आप सरकार का विरोध न करके देश का विरोध कर रहे हैं. अब यह मुद्दा भाजपा किसी भी तरीके से जाने नहीं देगी और यह विषय भारतीय जनता पार्टी तब तक उठाए रखेगी जब तक बजट सत्र का अगला चरण शुरू नहीं हो जाता. वहाँ पर दोनों पार्टियों के बीच में तनाव देखने को मिलेगा जो कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सही नहीं होगा. संसद का समय जाया होगा.

लोकतंत्र में सरकार के बराबर होता है विपक्ष

बल्कि होना यह चाहिए था कि जिन चार मुद्दों पर बात हो, चर्चा हो. सरकार का पक्ष जानने का मौका मिले. उन मुद्दों पर संसद में चर्चा होती और जनता को अपने जरूरी विषयों के बारे में जानकारी मिलती. कांग्रेस ने यह कदम उठाकर अपनी पार्टी का नुकसान तो किया ही है, साथ में उन मतदाताओं का भी नुकसान किया. अगर यह चर्चा नहीं हुई तो देश की अवाम का ही पैसा खर्च होगा.

यह कांग्रेस को समझना चाहिए कि वो एक मुख्य विपक्षी दल है. उसकी जिम्मेदारी उतनी ही है जितनी सरकार की है. उन्हें सरकार से सवाल करना है, सरकार को कटघरे में खड़ा करना है, लेकिन इस तरीके से नहीं कि ऐसा लगे कि आप सरकार का विरोध नहीं बल्कि इस देश का विरोध कर रहे हैं.

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