इन दिनों राज्यसभा का चुनाव काफी चर्चा में है. 16 मार्च को राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव होने वाला है. आइए जानते हैं कि राज्यसभा क्या है, इसमें कितनी सीटें हैं और इसका चुनाव कैसे होता है.
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 79 संसद की व्याख्या करता है और अनुच्छेद 80 राज्यसभा की व्याख्या करता है. संविधान की चौथी अनुसूची में राज्यसभा के लिए राज्यों व केंद्र शासित राज्यों के लिए सीटों का वर्णन किया गया है.
राज्यसभा के अन्य नाम हैं – उच्च सदन और स्थाई सदन. इसे स्थाई सदन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सदन कभी भी पूरी तरह रिक्त नहीं होता, यानी यह लोकसभा कि तरह भंग नहीं होता.
कितनी सीटें और कैसे भरी जाती हैं
राज्यसभा में अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें से 238 पर चुनाव होता हैं. लेकिन वर्तमान में केवल 245 सीटें उपयोग में हैं. जिस कारण 233 सीटों पर चुनाव होता है और 12 सीटें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत की जाती हैं. मनोनीत सदस्य कला, साहित्य, खेल, विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों से होते हैं.
सदस्यों का कार्यकाल
राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है. ध्यान रहे कि राज्यसभा का कोई कार्यकाल नहीं होता, केवल सदस्यों का कार्यकाल होता है. यह सदन कभी भी पूरी तरह से खाली नहीं होता. हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल पूरा होता है और उनकी जगह नए एक-तिहाई सदस्य आते हैं.
इस तरह हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्यों का चुनाव होता रहता है, जिससे यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है. और उच्च सदन भंग नहीं होता.
चुनाव कैसे होता है
राज्यसभा का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है. इस चुनावी प्रक्रिया को एकल संक्रमणीय मत प्रणाली कहा जाता है. प्रत्येक राज्य को राज्यसभा में सीटों का एक निश्चित कोटा होता है. राज्यों की विधानसभा के सदस्यों (विधायकों) द्वारा इन सीटों के लिए चुनाव किया जाता है.
मतदान में विधायक चुनाव में भाग ले रहे सभी प्रत्याशियों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता क्रम में मत देते हैं. मान लीजिए की तीन प्रत्याशी चुनाव में भाग ले रहे है, तो मतदाता तीनों को पसंद की क्रम में मतदान करेंगे.
जीतने के लिए कोटा फॉर्मूला
जीतने के लिए किसी प्रत्याशी को मतों का एक निश्चित कोटा प्राप्त करना होता है. राज्यसभा चुनाव प्रणाली का फॉर्मूला है:
(कुल मतदाता ÷ (कुल उम्मीदवार + 1)) + 1
उदाहरण से समझें
राजस्थान के उदाहरण से समझते हैं. राजस्थान में विधायकों की संख्या 200 है और मान लीजिए राज्यसभा के लिए 4 सदस्य चुने जाने हैं. तो किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए:
(200 ÷ (4 + 1)) + 1 = (200 ÷ 5) + 1 = 40 + 1 = 41 विधायकों
यानी राजस्थान में किसी उम्मीदवार को राज्यसभा जाने के लिए राजस्थान विधानसभा में 41 विधायकों जरूरत पड़ेगी.
NOTE- एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है. यह फॉर्मूला का भाग होता है, लेकिन हम यहां वैल्यू से न समझ कर आसान भाषा में समझ रहे हैं. यहां मतदाता कि बात हो रही है न कि विधायक के वोट की वैल्यू की.
मत गणना की प्रक्रिया
जब मतगणना होती है, तब उम्मीदवार को प्राप्त प्रथम वरीयता वाले वोट गिने जाते हैं. प्रथम वरीयता वोट की गणना के बाद यदि प्रत्याशी को निश्चित संख्या में वोटों का कोटा प्राप्त नहीं होता है, तो पुनर्गणना की जाती है.
सबसे कम प्रथम वरीयता वाले वोट पाने वाले प्रत्याशी को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोटों को द्वितीय वरीयता के अनुसार अन्य प्रत्याशियों में बांट दिया जाता है.
यह प्रक्रिया तब तक जारी रखी जाती है जब तक निर्धारित संख्या में प्रत्याशी कोटा प्राप्त नहीं कर लेते. जो प्रत्याशी कोटा प्राप्त कर लेता है, उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है. यह चुनाव प्रणाली समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का एक हिस्सा है.
