शंकराचार्य अपमान प्रकरण राजनीतिक खेल है. जो दिल्ली-लखनऊ में मतभेद को साफ करता है. पंकज चौधरी की नियुक्ति योगी के प्रभाव को कम करने की कोशिश पहली बड़ी कोशिश थी. राजनीतिक समीकरण बदलने के आसार.
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज में अपमान होने का प्रकरण जितना दिख रहा है, असल में यह उतना है नहीं. यह उससे बड़ा और अंदरूनी और राजनीतिक प्रकरण दिखाई दे रहा है. सबसे पहले तो आप इस बात पर गौर कीजिए कि यह प्रशासन और शंकराचार्य के बीच की लड़ाई नहीं है. शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार करना किसी भी प्रशासन के बस की बात नहीं है.
यह तभी हो सकता है जब मुख्यमंत्री का आदेश हो. लेकिन जो कुछ भी हुआ, पार्टी ने अपना बचाव कर लिया है. राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने तो खेल दिया – शंकराचार्य से कहा कि आप स्नान करें और बात को खत्म करें. इसमें अब बस एक व्यक्ति फँसते हुए दिख रहे हैं – राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ.
शंकराचार्य अपमान का इतिहास और सत्ता परिवर्तन
शंकराचार्य के साथ अब तक जितनी बदसलूकी हुई है, अगर आप उसके इतिहास में जाएंगे तो एक ही बात पाएंगे – सत्ता परिवर्तन. यह अभी तक का इतिहास रहा है. आप अखिलेश यादव सरकार के व्यवहार के याद कीजिए. उस घटना के बाद अखिलेश यादव कि सरकार चली गई थी.
दिल्ली-लखनऊ के मतभेद
दिल्ली और लखनऊ के मतभेद किसी से नहीं छुपे, वो 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम में भी नजर आए थे. फिर एक और प्रकरण याद कीजिए – उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का. जहां मुख्यमंत्री स्वतंत्र देव को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन दिल्ली ने खेल किया और अध्यक्ष कुर्मी जाति का ही लिया, लेकिन योगी की पसंद का नहीं, अपनी पसंद का – पंकज चौधरी.
पंकज चौधरी की नियुक्ति का राजनीतिक संदेश
अब जो उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझते हैं, वो जानते हैं कि पंकज चौधरी महाराजगंज से हैं और सातवीं बार के सांसद हैं. उससे बड़ी बात यह कि महाराजगंज गोरखपुर मंडल में ही आता है. अब यह सारी कड़ी जोड़ लीजिए – जाति वो जो योगी आदित्यनाथ चाहते थे, जिससे वो विरोध न कर पाएं. फिर क्षेत्र भी गोरखपुर, यानी उसी क्षेत्र से अध्यक्ष बनाकर योगी आदित्यनाथ के प्रभाव को कम करना. यानी राजनीतिक रूप से मात देना.
ब्राह्मण विधायकों की बैठक भी एक कड़ी
अब धार्मिक रूप से तैयारी हो ही रही है और यह कोई पहला मौका नहीं है. कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की थी, तो वो वाकया भी इसमें ही जोड़ लीजिए.
चारों शंकराचार्य की PM से होगी मुलाकात
अब अगर आप सारे किस्सों को जोड़कर देखें तो पता चलेगा – खेल कौन खेल रहा है और दिख कौन रहा है. और यहां से जो बात नहीं संभलेगी, तो मैं आपको बता दूं कि कुछ समय बाद चारों शंकराचार्य की मुलाकात प्रधानमंत्री से होने वाली है.
ये सारे समीकरण एक तरफ ही इशारा करते हैं. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक बदलाव होने वाला है. हालांकि यह सिर्फ राजनीतिक विश्लेषण है और आने वाला समय ही सच्चाई बताएगा.
