March 10, 2026

2025 की वो कमाल की फिल्में जो चर्चा से रह गईं | Underrated Indian Films of 2025 You Should Not Miss

2025 की वो कमाल की फिल्में जो चर्चा से रह गईं | Underrated Indian Films of 2025 You Should Not Miss

2025 में भारतीय सिनेमा ने कई मेगा-बजट, बड़े सितारों और भारी प्रचार वाली फिल्में देखीं।
लेकिन इस चकाचौंध के बीच कुछ ऐसी फिल्में भी आईं जो कंटेंट, भावना और सिनेमा की आत्मा से भरपूर थीं — फिर भी वे दर्शकों की मुख्य चर्चा से दूर रहीं।

ये फिल्में केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि जीवन का आईना बनती हैं।


2025 की अनदेखी लेकिन बेहतरीन फिल्में – एक नजर में

फिल्मनिर्देशकमुख्य कलाकारविषयक्यों खास
मेहता बॉयसबमन ईरानीबमन ईरानी, अविनाश तिवारीपिता-पुत्र संबंधरिश्तों की खामोश भाषा
धड़क 2शाज़िया इक़बालसिद्धांत चतुर्वेदीजातिवाद, प्रेमआज के भारत की सच्चाई
I Want to Talkसुजीत सरकारअभिषेक बच्चनआत्म-संवादभावनात्मक गहराई
कालीधर लापतामधुमिता सुंदरारमनअभिषेक बच्चनपहचान और जीवनसाधारण में असाधारण
पोनमैनजोतिश शंकरबेसिल जोसेफ, साजिन गोपू, लिजोमोल जोस, दीपक परम्बोल, आनंद मनमधनसामाजिक यथार्थअलग दुनिया का अनुभव

1. मेहता बॉयस — रिश्तों की वो कहानी जो दिल से उतरती है

बमन ईरानी की यह पहली डायरेक्शनल फिल्म किसी अनुभवी निर्देशक की तरह परिपक्व लगती है।
फिल्म भारतीय परिवारों में मौजूद उस रिश्ते को दिखाती है जहाँ प्यार होता है, पर शब्द नहीं मिलते

अविनाश तिवारी और बमन ईरानी के बीच की केमिस्ट्री दर्शकों को अपने पिता-पुत्र संबंध की याद दिला देती है।

क्यों देखें?
क्योंकि यह फिल्म आपको शोर से नहीं, खामोशी से तोड़ती है।


2. धड़क 2 — 21वीं सदी का कड़वा सच

Dhadak 2

यह फिल्म दिखाती है कि आज के आधुनिक भारत में भी जातिवाद सिर्फ इतिहास नहीं, वर्तमान है।

सिद्धांत चतुर्वेदी की एक्टिंग फिल्म की रीढ़ है।
अगर यही कहानी किसी मेगा स्टार के साथ आती, तो यह 2025 की सबसे चर्चित फिल्म होती।

हम करण जौहर को परिवारवाद पर कोसते हैं,
लेकिन जब वह सामाजिक रूप से जरूरी फिल्म बनाते हैं,
तो अक्सर उसे वह सम्मान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए।


3. I Want to Talk — आत्मसंवाद की संवेदनशील कहानी

इस फिल्म में अभिषेक बच्चन अपने अभिनय के सबसे परिपक्व और प्रभावशाली रूप में नजर आते हैं।
सुजीत सरकार के निर्देशन में बनी यह फिल्म मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष, संवाद और अकेलेपन को बेहद खूबसूरती से सामने लाती है।

यह फिल्म हमें सिखाती है कि कभी-कभी सबसे जरूरी बातचीत खुद से होती है।


4. कालीधर लापता — पहचान और जीवन की खोज

मधुमिता सुंदरारमन के निर्देशन में बनी यह फिल्म जीवन की उन परतों को खोलती है
जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

अभिषेक बच्चन यहां भी एक आम आदमी की तरह दिल तक पहुंचते हैं।
बाल कलाकार के साथ उनका अभिनय फिल्म को और अधिक मानवीय बना देता है।


5. पोनमैन — जब सिनेमा आपको किसी और दुनिया में ले जाए

जोतिश शंकर द्वारा निर्देशित यह फिल्म सामाजिक यथार्थ की ऐसी कहानी है
जो दर्शक को धीरे-धीरे अपनी दुनिया में खींच लेती है।

फिल्म के प्रमुख कलाकार —
बेसिल जोसेफ, साजिन गोपू, लिजोमोल जोस, दीपक परम्बोल और आनंद मनमधन
अपने किरदारों में जान डाल देते हैं।

कहानी एक ऐसे सुनार की है जो शादियों में लोगों को उधार गहने देता है।
शुरुआत में साधारण लगने वाली यह कहानी अंत तक आते-आते गहरे जीवन-सत्य में बदल जाती है।


निष्कर्ष

2025 सिर्फ बड़े पोस्टर और स्टार पावर का साल नहीं था।
यह उन फिल्मों का साल भी था जो दिल, दिमाग और समाज से बात करती हैं

काश इन फिल्मों पर उतनी ही चर्चा होती
जितनी इनके कंटेंट की गहराई के मुताबिक होनी चाहिए थी।

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