March 10, 2026

साहित्य आजतक 2025: शब्दों का महाकुंभ और साहित्य का सबसे बड़ा उत्सव

साहित्य आजतक 2025: शब्दों का महाकुंभ और साहित्य का सबसे बड़ा उत्सव

भारतीय साहित्य जगत के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक साहित्य आजतक हर साल की तरह इस साल भी अपनी नई चमक के साथ लौटा है। दिल्ली के हृदय में आयोजित मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में यह त्रिदिवसीय साहित्यिक पर्व का आयोजन किया गया। सिर्फ किताबों और लेखकों का मंच नहीं, बल्कि विचारों, बहसों, कविता, कला, संगीत और संस्कृति का विशाल उत्सव देखने को मिला है। इस बार का आयोजन अपनी भव्यता, विविधता और युवाओं की भागीदारी के कारण पहले से ज्यादा सुंदर नज़र आया है।  जहाँ पर हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। 

जिसमे देश-दुनिया के मशहूर कवि, लेखक, कलाकार, संगीतकार, नाटककार, अभिनेता, रंगकर्मी, चिंतक और विचारक शामिल हुए।  

साहित्य आजतक में कुमार विश्वास, चेतन भगत, नेहा कक्कड़, पीयूष मिश्रा,बृजेन्द्र चौहान जैसे अन्य दिग्गज हस्थियों ने शिरकत की।  

इसके अलावा साहित्य आजतक में इमरान प्रतापगढ़ी,मनोज तिवारी, स्मृति इरानी,अक्षरा सिंह,जिम सरभ,नमिता दुबे और भी दिग्गजों ने भाग लिया। पीयूष मिश्रा अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं. साहित्य आजतक में पहले दिन यानी 21 नवंबर को पहले स्टेज पर उनका विशेष कार्यक्रम हुआ जिसका नाम है, ‘तुम्हारी औकात क्या है यह नाम को इसलिए रखा गया था कि उनके द्वारा लिखी गई आत्मकथा ‘तुम्हारी औकात क्या है उसी आत्मकथा नाम को कॉपी किया गया। 

नेहा कक्कड़ ने अपनी आवाज से मंत्रमुग्ध किया और आज देश के टॉप सिंगर्स में नेहा कक्कड़ की गिनती होती है।  नेहा ने सिर्फ चार साल की उम्र में माता रानी के जगराता में गाना शुरू कर दिया था।  नेहा कक्कड़ की न सिर्फ आज लाखों की फैन फॉलोइंग है, बल्कि उनके गाने और आवाज भी खूब पसंद की जाती है।   नेहा कक्कड़ ने साहित्य आजतक में 23 नवंबर दिन रविवार को शिरकत की और उनके गानों के माध्यम से लोग झूमते हुए नजर आए। 

तीन ताल का गूँजा अनोखा अंदाज इस बार साहित्य आजतक में तीन ताल का दिखा अनोखा अंदाज। 

ताऊ, खानचा और सरदार तीन अलग सुर, लेकिन एक ही ताल, लेकर आए जिसमे जिंदगी, समाज और सियासत पर अपनी वही दिलचस्प, बेबाक और हंसी से भरी बातचीत देखने को मिली है।  यह सिर्फ पॉडकास्ट नहीं, बल्कि जिंदगी का एक अनुभाव है। जहां हर बात में होती है ठिठोली, हर मजाक में छुपा होता है मतलब, और हर तर्क के पीछे झलकती है।  सच्चाई,उसके बाद युवा पीड़ी को बृजेन्द्र चौहान सर के माध्यम से बहुत कुछ सीखने को मिला है।  जहा पर उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर अपना ज़्यादा समय बर्बाद न करे, और समय का सही उपयोग करे। उन्होंने कहा अगर आप फ्री रहेगे और खराब चीज देखते रहेगे तो आप भी एक दिन खराब ही बन जायेगे,और जिस तरह खराब कूड़े को फेक देते है।  उसी तरह आपको भी ये समाज फेंक देगा।  इसलिए समय का सद्प्रयोग करे। 

हल्ला बोल चौपाल दिन भर सितारों की बरसात इसके बाद मंच पर एक से बढ़कर एक चर्चित चेहरे आते रहे।  स्मृति ईरानी, जो अपनी अभिनय, लेखन और राजनीति पर चर्चा करती नजर आईं। 

‘पाताल लोक’ से लोकप्रिय हुए जयदीप अहलावत, अपनी सादगी और अभिनय यात्रा के साथ मंच पर छाए रहे। प्रसिद्ध गीतकार इरशाद कामिल ने अपनी चर्चित लाइनों ‘सैयारा तू तो बदला नहीं है…गाने के बोल के पीछे की कहानी सुनाई प्रसिद्ध गीतकार इरशाद कामिल ने अपनी दर्शकों की भारी भीड़ इस बात को साबित करती है कि साहित्य प्रेमियों के लिए यह एक ऐसा मौका था जिसे वे खोना नहीं चाहते थे. उनकी कविताओं, दृष्टांतों और मंच-संवादों ने जैसे पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक गहराई से जोड़ दिया। 

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