March 10, 2026

के. कामराज: भारतीय राजनीति के ‘किंग मेकर’ की गौरवगाथा

के. कामराज: भारतीय राजनीति के ‘किंग मेकर’ की गौरवगाथा

भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने स्वयं ‘किंग’ बनने के बजाय ‘किंग मेकर’ की भूमिका निभाकर देश का भविष्य तय किया। ऐसे ही एक महान नेता थे कामाक्षी कुमारस्वामी नादर, जिन्हें दुनिया के. कामराज के नाम से जानती है। वे न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक भी थे

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

के. कामराज का जन्म 15 जुलाई 1903 को तमिलनाडु के विरुधुनगर में एक दलित परिवार में हुआ था । उनके जीवन का शुरुआती दौर संघर्षों से भरा रहा:

  • जब वे महज 6 साल के थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया 。
  • परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्हें मात्र 11 साल की उम्र में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी 。
  • शिक्षा अधूरी रहने के बावजूद, उनकी राजनीतिक समझ और देशभक्ति उन्हें बुलंदियों तक ले गई 。

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

कामराज बहुत कम उम्र में ही देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे:

  • 1916 में मात्र 13-14 साल की उम्र में उन्होंने एनी बेसेंट के ‘होम रूल लीग’ आंदोलन में हिस्सा लिया 。
  • वे जलियांवाला बाग हत्याकांड से इतने प्रभावित हुए कि गांधीजी के असहयोग आंदोलन का हिस्सा बन गए और 18 साल की उम्र में कांग्रेस के सदस्य बने 。
  • उन्होंने गांधीजी के नमक सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी 。
  • ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आंदोलन सहित विभिन्न संघर्षों के दौरान उन्होंने अपने जीवन के 3000 से भी ज्यादा दिन जेल में बिताए

मुख्यमंत्री के रूप में क्रांतिकारी सुधार

1954 में के. कामराज मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री बने । उनका कार्यकाल विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है:

  • उन्होंने कक्षा 11वीं तक की शिक्षा को अनिवार्य और मुफ्त कर दिया 。
  • भारत में स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) योजना शुरू करने का श्रेय उन्हीं को जाता है, ताकि गरीबी बच्चों की पढ़ाई में बाधा न बने 。
  • उनके ही प्रयासों से 1959 में मद्रास में IIT की स्थापना हुई 。
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री(बाएं) और पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू(दाएं) के बीच में बैठे के. कामराज

प्रसिद्ध ‘कामराज प्लान’ और किंग मेकर की भूमिका

1963 में उन्होंने महसूस किया कि कांग्रेस संगठन राज्यों में कमजोर हो रहा है। उन्होंने नेहरू के सामने एक योजना रखी, जिसे ‘कामराज प्लान’ कहा गया । इसके तहत उन्होंने खुद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया ताकि वे पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए काम कर सकें । इसके तुरंत बाद वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने

एक ‘किंग मेकर’ के रूप में उन्होंने दो बार देश का नेतृत्व तय किया:

  1. लाल बहादुर शास्त्री: नेहरू के निधन के बाद, उन्होंने मोरारजी देसाई की जगह शास्त्री जी को प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई 。
  2. इंदिरा गांधी: शास्त्री जी के निधन के बाद, उन्होंने एक बार फिर अपनी राजनीतिक कुशलता से इंदिरा गांधी को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना 。

राजनीतिक उतार-चढ़ाव और अंतिम समय

समय बीतने के साथ इंदिरा गांधी और कामराज (सिंडिकेट गुट) के बीच दूरियां बढ़ने लगीं 。 1969 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हुए विवाद के बाद कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई—कांग्रेस (O) और कांग्रेस (R)

कामराज का निधन 2 अक्टूबर 1975 को 72 वर्ष की आयु में हुआ । उनके देश के प्रति निस्वार्थ योगदान को देखते हुए, 1976 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया

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